डॉ. अंजु बाला
1 दिसंबर 1978 को हरियाणा के मिर्चपुर (हिसार) के एक शिक्षित किसान परिवार में जन्म। आरंभिक शिक्षा गांव में। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र से बी.ए., एम.ए., बी.एड. और पीएच.डी.। जर्मन भाषा और साहित्य का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा भी। दर्जनों शोध आलेख राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित। तीस से अधिक राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध पत्रों की प्रस्तुति। अंतरानुशासिक पूर्व समीक्षित शोध पत्रिका ‘बोहल शोध मंजूषा’ के दो अंकों का संपादन। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज में 2011 से अध्यापन। प्रकाशित कृतियाँ : ‘नारीवाद की हिंदी कथा’, ‘साहित्य, मीडिया और आजीविका’, ‘नामवर सिंह का संसार’, ‘हिंदी साहित्य में दलित विमर्श’, ‘हिंदी साहित्य विमर्श के नये आयाम’। संप्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) देव नगर, करोलबाग, नई दिल्ली-110005
- Criticism / Aalochana, Hard Bound
Nariwad ki Hindi Katha / नारीवाद की हिन्दी कथा
₹599.00अनुक्रम
भूमिका
नारीवाद की हिन्दी कथा (संदर्भ : प्रभा खेतान और मैत्रेयी पुष्पा)
अस्मितापरक हिन्दी लेखन और 19वीं सदी का समाज
नारीवादी परिप्रेक्ष्य में मैत्रेयी पुष्पा की आत्मकथा
…Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product pageQuick View - Criticism / Aalochana, Differently Abled / Divyang, Hard Bound
Hindi Sahitya aur Divyang Vimarsh / हिन्दी साहित्य और दिव्यांग विमर्श – आलोचना
₹599.00अनुक्रम
भूमिका
सूरदास एक लोकप्रिय गाँधी – डॉ. महेन्द्र सिंह धाकड़
दिव्यांगता विमर्श साहित्य में नवीन प्रतिमान एवं आदर्श को गढ़ने का प्रतिष्ठा काल और आवश्यकता –डॉ. गीता…Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product pageQuick View - Art and Culture / Kala avam Sanskriti, Criticism / Aalochana, Hard Bound, Poetics / Sanskrit / Kavya Shashtra
Bhakti Kavya aur Hindi Aalochana – Ek Punravlokan / भक्ति काव्य और हिन्दी आलोचना — एक पुनरवलोकन
₹599.00पुस्तक का अंश
पितृसत्तात्मक समाज-व्यवस्था में एक तरफ स्त्री को शारीरिक रूप से कमजोर बताया जाता है और दूसरी तरफ घर के बाहर और भीतर तक सबसे कठिन काम…
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Sahitya kai Naye Pariprekshya / साहित्य के नये परिप्रेक्ष्य
₹599.00पुस्तक के अंश
‘समरशेष है’ (1999) झारखंड आन्दोलन पर लिखा गया अब तक का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। यह उपन्यास संथाल आदिवासियों के महाजनी शोषण और सरकारी परियोजनाओं से होने…
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