Chandra Shekhar — Aadmi, Aandolan aur Rajneeti

₹350.00

Language: Hindi
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चंद्रशेखर जी के आर्थिक चिंतन को समझने के लिए 1990–91 के अभूतपूर्व आर्थिक संकट को याद करना आवश्यक है। जब उन्होंने प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला, तब देश गंभीर भुगतान-संतुलन संकट से गुजर रहा था। खाड़ी युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई थीं, विदेशी मुद्रा भंडार अत्यंत निम्न स्तर पर पहुँच चुका था और भारत के लिए अपने आवश्यक आयातों तथा विदेशी देनदारियों का भुगतान करना कठिन हो रहा था।
इस संकटपूर्ण परिस्थिति में उनकी अल्पमत सरकार ने राजनीतिक जोखिम उठाते हुए देश को तत्काल भुगतान संकट से बचाने के लिए कठोर कदम उठाए। उनकी कार्यवाहक सरकार के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से 20 टन सोने का उपयोग विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए किया गया। बाद में नई सरकार के समय भारतीय रिजर्व बैंक ने लगभग 47 टन अतिरिक्त सोना विदेश में गिरवी रखकर संसाधन जुटाए। इस पूरे प्रसंग को केवल सोना गिरवी रखने की घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह उस गहरे आर्थिक संकट का संकेत था, जिसमें देश की संप्रभु निर्णय-क्षमता पर बाहरी दबाव बढ़ रहे थे।
चंद्रशेखर जी वैश्विक आर्थिक संबंधों के विरोधी नहीं थे, लेकिन उनका स्पष्ट विश्वास था कि विदेशी सहायता या ऋण भारत की स्वतंत्र नीति का विकल्प नहीं हो सकता। आर्थिक सुधारों का अंतिम उद्देश्य बाजार को मुक्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य को अभाव और शोषण से मुक्त करना होना चाहिए।
आज जब आर्थिक विकास को मुख्यतः सकल घरेलू उत्पाद, शेयर बाजार और पूँजी निवेश के आँकड़ों से मापा जाता है, तब चंद्रशेखर जी की दृष्टि हमें मूल प्रश्न की ओर लौटाती है—विकास किसके लिए और किस कीमत पर? क्या विकास से किसान की आय सुरक्षित हुई? क्या युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला? क्या श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा मिली? क्या छोटे व्यापारी, कारीगर और ग्रामीण उद्यमी आर्थिक परिवर्तन में बराबर के भागीदार बने?
उनके लिए आत्मनिर्भरता किसी एक सरकारी नारे का नाम नहीं था। उसका अर्थ था—गाँव अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए सक्षम बने, स्थानीय उत्पादन और रोजगार बढ़े, जिलों की अपनी आर्थिक योजनाएँ हों और देश खाद्य, ऊर्जा, तकनीक तथा आवश्यक वस्तुओं के लिए अत्यधिक बाहरी निर्भरता से मुक्त रहे। उनका मानना था कि दिल्ली में तैयार आर्थिक नीतियों की वास्तविक परीक्षा भारत के गाँवों, खेतों और श्रमिक बस्तियों में होती है।

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Description

विषय-सूची

  • पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर: जन्म शताब्दी पर उनके आर्थिक चिंतन की प्रासंगिकता — सुधीन्द्र भदौरिया
  • लोकतांत्रिक नैतिकता की निर्मल पदचाप — अरुण कुमार त्रिपाठी & रणधीर कुमार गौतम
  • चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि पर‌ आंखों देखे संस्मरण! — प्रोफेसर राजकुमार जैन
  • भारतीय राजनीति के कबीर थे चंद्रशेखर — कृपाशंकर चौबे
  • जननायक चंद्रशेखर: सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता — मोहम्मद इरफान ऊर्फी
  • राष्ट्रीय राजनीति में चंद्रशेखर जी का अनूठा स्थान — प्रो. आनन्द कुमार
  • चंद्रशेखर का महत्त्व — रघुवीर सहाय
  • पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर… जैसा मैंने देखा !! — गोपाल शर्मा
  • चन्द्रशेखर जन्मशती : बग़ावत की विरासत और समाजवाद का अधूरा एजेंडा — अनिल अत्रि
  • Reminiscences of a Bharat Yatri — Sudhindra Bhadoria
  • सत्ता, स्व और स्मृति : चंद्रशेखर कृत “मेरी जेल डायरी” — परिचय दास
  • तोड़ने नहीं, जोड़ने के लिए जाने जाएंगे चंद्रशेखर — अरुण कुमार त्रिपाठी
  • चंद्रशेखर : एक मोहभग्न आदर्शवादी की अदम्य राजनीतिक यात्रा — सूर्य कुमार
  • The Beacon of Hope — Bhai Vaidya
  • चंद्रशेखर : करुणामयी समाजवादी नेता — रणधीर कुमार गौतम
  • पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और देशज पसमांदा समाज — डॉ. फैयाज अहमद फैजी
  • चंद्रशेखर: संसदीय लोकतंत्र के गरिमामय रक्षक — डॉ. जयन्त जिज्ञासु
  • जनाकांक्षाओं के शिल्पी और संवेदना के प्रतीक थे चंद्रशेखर — रवीन्द्र भारती
  • चंद्रशेखर होने के मायने — राजीव हेमकेशव
  • चंद्रशेखर, न भूतो… न भविष्यति — राकेश रजोरिया
  • Remembering Chandrasekhar — Mohan Guruswamy
  • Why Chandra Shekhar Still Matters! — Neerja Chowdhury
  • An Enduring Bond: The Friendship of Jayaprakash Narayan and Chandra Shekhar — Sujata Prasad
  • CHANDRA SHEKHAR : A PROFILE
  • लेखक एवं योगदानकर्ताओं का परिचय
  • Appendix 1

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